क्या कभी तुमने कोई सपना देखा हैं?
और देखा हैं एक चेहरा,
गुनगुनाता हुआ, खिलखिलाता हुआ।
हल्के दबे पावों से,
तुम्हारे चेहरे के ठीक बगल में खड़ें होकर,
ललाट पर कोमल हाथ फेरते हुए,
और धीरे धीरे तुम्हारे कान के पास आकर,
एक गीत सुनाता हुआ।
जिसके धुन अभी तक तुम्हें याद हैं।
जिसके बोल अभी तक ताजे हैं।
हाँ याद करो,
शायद,
वो तुम्हारा प्रेमी था,
या कोई सच्चा दोस्त?
जिसकी बातों में
तुम अक्सर खो जाया करती थीं ।
जिसके चेहरे की किताब,
बिना उल्टे पढ़ लिया करती थीं।
और बांट लेती थीं सारे गम,
जिसमे वो डूबा रहता ।
तुम्हारे चेहरे की मुस्कान,
उसके सूनेपन और ग़मों की थी रामवाण।
और तुम्हारी बतियाँ,
जो उसे बांधे रखती, सुबह, दोपहर, शाम।
उसके होठों पर शायद,
हरपल था तुम्हारा नाम।
जिसे लेने से वो घबराता, शर्माता,
फ़िर भी तुम पूछा करती उससे,
कौन हैं जो तुम्हारे ख्वाबों में आता हैं।
और वो चुपचाप खोल कर एक हंसी,
यूँ ही हंसने लगता,
शायद छुपाना चाहता हों,
यां
बताना चाहता हों की,
क्यूँ पूछती हो बार बार जब की तुम्हें पता हैं,
मेरे ख्वाबों के बारे में भी।
पर शायद तुम सुनना चाहती थीं,
उसके मुंह से अपना नाम ।
तभी नींद खुल जाती हैं,
सपना टूट जाता हैं।
मगर,
उनींदी आंखों में अभी तक छाया हैं
"स्वप्न का नशा" ।
उसके होंठ बरबस
रमने लगते हैं तुम्हारे नाम की माला ।
शायद वो भी आज सुनाना चाहता था,
वो जो बंद था आज तक,
होठों की चाहरदीवारी में।
चैन मिला था उसे और शायद तुम्हें भी,
जब एक सपना बन गया हकीकत यूँ ही।
beautiful imagination and great choice of words
ReplyDeleteDhanywaad sir..aapke comments ki bahut jaroorat hain. Cheers
ReplyDeletethis one is awesome dude.....i'm gonna send it to my gf...
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